बिल्व वृक्ष को बेल वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत में पीपल, नीम, आम इत्यादि के समान पाया जाता है। बिल्व वृक्ष हिन्दू धर्म ग्रन्थों और पौराणों में इस बिल्प वृक्ष का बहुत महत्व है। बिल्प वृक्ष अपने आप में एक विशेष महत्व रखता है।
 बिल्व अर्थात बेल वृक्ष हिन्दू धर्म में तीनों लोकों के स्वामी भगवान शिव जी का अराधना का मुख्या अंग है। इसलिए इस बिल्व वृक्ष को मंदिरों के पास लगाया जाता है। 

बिल्व वृक्ष का पौराणों और ग्रंथों में विशेष महत्व, जानियें विस्तरित जानकारी
बिल्व वृक्ष का पौराणों और ग्रंथों में विशेष महत्व, जानियें विस्तरित जानकारी


विज्ञान की दृष्टि से बिल्व अर्थात बेल वृक्ष के फल की तासीर ठंड़ी होती है। इसलिए गर्मियों के दिनों में बिल्व वृक्ष के फल का शर्बत बहुत गुणकारी होता है, तथा फल के सेवन से आँखों की रोशनी तेज होती है, और पेट के कीडेव लू से बचाती है।

बिल्व वृक्ष का पौराणों और ग्रंथों में विशेष महत्व

बिल्व वृक्ष अर्थात बेल वृक्ष का पौराणों और ग्रंथों में बहुत महत्व है। तीनों लोकों के स्वामी भगवान शिव जी का अत्यन्त प्रिय वृक्ष है। इसलिए भगवान शिव जी की पूजा के समय इस विल्व वृक्ष के फल व पत्ते शिव जी को अर्पीत करते हैं।
बिल्व वृक्ष को बेल वृक्ष केमहत्व को खास प्वाइट के माध्यम से निम्न प्रकार से स्पष्ट किया है..........

  • पौराणों और ग्रंथों की माने तो बिल्प वृक्ष के आस - पास सांप नही आते हैं।
  • अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है l
  • वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है l
  • चार, पांच, छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्र पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है l
  • बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है एवं बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
  • सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता है।
  • बेल वृक्ष को सींचने से पित्र तृप्त होते है।
  • बेल वृक्ष और सफ़ेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
  • बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे ।
  • जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी शिव लिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी जीव सभी पापों से मुक्त हो जाते है l
  •  बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है।
  • कृपया बिल्व पत्र का पेड़ जरूर लगाये । बिल्व पत्र के लिए पेड़ को क्षति न पहुचाएं l