विकास के पथ पर भारत केंद्र राज्य सरकारों की योजनाओं का ब्योरा की पुस्तक
लोकसभा चुनाव के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करने वाले लेखकों में उनकी तारीफ करने की होड़ सी लगी है मोदी जी पर लिखी किताबों की बाढ़ सी आ गई है कुछ लोग उनके व्यक्तित्व पर लिख रहे तो कुछ कृतित्व पर, कुछ जीवनी लिख रहे तो कुछ उनके व्याख्यान पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ मालवीय की किताब विकास के पथ पर भारत इससे थोड़ी अलग है। हालांकि किताब के कवर पर संसद भवन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की खिलखिलाती तस्वीर देख यह लगता है कि यह किताब भी उनका प्रचार करने वाली ही है पर इसके पढनें व पेज पलटने के बाद यह मान्यता बदलती सी लगती है यह स्पष्ट हो जाता है कि यह किताब सरकारी योजनाओं के सूचनात्मक व्याख्यात्मक विवरण और तथ्यों पर आधारित है न कि तारीफ पर सौरभ मालवीय ने गहन अध्ययन के बाद इस किताब के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकारों की 36 प्रमुख योजनाओं को समझाने की पहल की है।देश के लोगों के सामाजिक आर्थिक और शैक्षिक विकास के लिए सरकार अनेक योजनाएं चला रही हैं। हर योजना का उद्देश्य होता है कि उसका लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे जब योजना का लाभ व्यक्ति तक पहुंचता है वह योजना सफल होती है इस समय देश में लगभग डेढ़ सौ योजनाएं चल रही हैं इनमें अधिकतर पुरानी योजनाएं हैं इनमें कई ऐसी पुरानी योजनाएं भी हैं जिनके नाम बदल दिए गए हैं इनमें कई ऐसी योजनाएं भी हैं जो लगभग बंद हो चुकी थीं और उन्हें दोबारा शुरू किया गया है इनमें कुछ नई योजनाएं भी सम्मिलित हैं देश में दो प्रकार की सरकारी योजनाएं चल रही हैं पहली योजनाएं वे हैं जो केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती हैं इस तरह की योजनाएं पूरे देश या देश के कुछ विशेष राज्यों में चलाई जाती हैं दूसरी योजनाएं वे हैं जो राज्य सरकारें चलाती हैं इस पुस्तक के माध्यम से सरकारी की कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्हें पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है अकसर ऐसा होता है कि अज्ञानता और अशिक्षा के कारण लोगों को सरकार की जन हितैषी योजनाओं की जानकारी नहीं होती जिसके कारण वे इन योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं इस पुस्तक का उद्देश्य यही है कि लोग उन सभी योजनाओं का लाभ उठाएं जो सरकार उनके कल्याण के लिए चला रही है। इन योजनाओं की जानकारी संबंधित मंत्रालयों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है उल्लेखनीय है कि समय-समय पर योजनाओं में आंशिक रूप से परिवर्तन भी होता रहता है।
प्रकाशक यश पब्लिकेशंस ने भी अपनी बात कही है प्रकाशक ने लिखा है कि देश की केंद्र सरकार और राज्य सरकारें जनता के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चला रही हैं इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य जनता के जीवन स्तर में सुधार लाना तथा सभी क्षेत्रों का समान विकास सुनिश्चित बनाना है सरकार द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लक्षित समूहों की स्थिति के अनुरूप तैयार किया जाता है ताकि लक्षित वर्ग इन से लाभान्वित हो सके सरकार महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दे रही है और इसके लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं सरकार द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ प्रधानमंत्री उज्जवला योजना जन धन योजना प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना डिजीटल इंडिया तथा स्वच्छ भारत मिशन आदि महत्वकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं यह पुस्तक केंद्र और राज्य सरकारों की ऐसी ही कुछ योजनाओं पर प्रकाश डालती है इस पुस्तक के माध्यम से सरकार की जनहितैषी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है निश्चित रूप से यह पुस्तक अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त करेगी।
इस किताब की भूमिका में वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा ने लिखा है कि विकास के आंकड़ों में आम आदमी हमेशा ही एक सवाल का जवाब ढ़ूंढता है सवाल ये है कि इन आंकड़ों का मेरे लिए क्या मतलब है। सवाल तब और भी अहम बन जाता है कि एक ही दिन अखबार की दो सुर्खियां अलग-अलग कहानी कहती हैं पहली सुर्खी है भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाला देश बना या फिर भारत अगले दो वर्षों तक सबसे तेजी से विकास करने वाला बना रहेगा देश वहीं दूसरी सुर्खी है अरबपतियों की संपत्ति रोजाना औसतन 2200 करोड़ रुपए बढ़ी भारी गरीबी में जी रही 10 फीसदी आबादी लगातार 14 सालों से कर्ज में है डूबी ऐसे में ये सवाल और भी अहम बन जाता है कि 7.3 7.5 या 7.7 फीसदी की सालाना विकास दर के मायने आबादी के एक बहुत ही छोटे हिस्से तक सीमित है या फिर इनका फायदा समाज में आखिरी पायदान के व्यक्ति को भी मिल पा रहा है या नहीं
विभिन्न सरकारी योजनाओं को शुरू करने का लक्ष्य यही है कि विकास का फायदा हर किसी को मिले यानी विकास समावेशी हो कुछ ऐसे ही पैमानों के आधार पर यहां उल्लेखित 36 योजनाओं का आंकलन किया जाना चाहिए फिर ये सवाल उठाया जा सकता है कि क्या ये योजनाएं कामयाब हैं अगर सरकार कहे कामयाब तो असमानता को लेकर जारी नई रिपोर्ट को सामने रख चर्चा करने से नहीं हिचकना चाहिए एक बात तो तय है कोई कितना भी धर्म.जाति.संप्रदाय को आधार बनाकर राजनीति कर ले लेकिन मतदाता ईवीएम पर बटन दबाने के पहले एक बार जरुर सोचता है कि अमुक उम्मीदवार ने विकास के लिए क्या कुछ किया है या फिर क्या वो आगे विकास के बारे में कुछ ठोस कर सकेगा मत भूलिए सरकारी योजनाएं आपके ही पैसे से चलती हैं और इन योजनाओं की सार्थकता पर अपना पक्ष रखने के लिए हर पांच साल में आपको एक मौका तो मिलता ही है।
nbsp;ऐसी सोच विकसित करने के लिए जरुरी है कि आपके समक्ष सरकारी योजनाओं का ब्यौरा सरल और सहज तरीके से पेश किया जाएण् पुस्तक विकास के पथ पर भारत इस काम में मदद करेगी
पुस्तकः विकास के पथ पर भारत
लेखकः डॉ सौरभ मालवीय
प्रकाशकः यश पब्लिकेशंस
मूल्यः 395 रुपए
पृष्ठ संख्याः 159
0 Comments