जहां-जहां श्रीरामकथा के पाठ होते है वहां-वहां श्री हनुमानजी कथा में सबसे
पहले आते हैं और सब के बाद जाते हैं। क्योंकि श्रीराम कथा अपने आप में एक
संपूर्ण ज्ञान है, जिसमें भगवान श्रीराम ने मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में
इस संसार मे पूर्ण मर्यादा में रहते हुए पूरे जगत को एक दिशा दी है। यह
प्रवचन पुरानी आबादी स्थित सिद्धपीठ श्री झांकीवाले बालाजी बगीची में
श्रीरामकथा में शनिवार को कथावाचक महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद महाराज
(ग्वालियर वाले) ने कहे। उन्होंने कहा कि श्री रामकथा के चार घाट हैं-कर्म
घाट, ज्ञान घाट, भक्ति घाट और शरणागति घाट। राम कथा में जितने भी पात्र हैं
वह पूरी तरह से सराहनीय हैं। राम कथा में बताया गया है कि कैसे मां, पिता,
पुत्र, पुत्री और प|ी ने अपने किरदार को समझकर पूरी निष्ठा से जीवन का
निर्वाह किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा सुनने से जीवन की सारी बाधाएं
दूर हो जाती हैं।
हनुमान को पाने का एक ही मंत्र है हनुमान चालीसा :
कृष्णानंद महाराज ने कहा कि यदि हनुमान न होते तो जगत में रामकथा भी न होती। जिन्हें भी भगवान के दर्शन हुए हनुमान की कृपा से हुए। चाहे वानर हो, सुग्रीव हो, विभीषण हो अथवा जानकी। यदि हनुमान से हमारा संबंध स्थापित हो गया तो किसी अन्य देव की जरूरत ही नहीं। जिस काम को ब्रह्मा , विष्णु, महेश भी नहीं कर सकते उसे हनुमान कर सकते हैं। यदि ज्योतिष के अनुसार मनुष्य के नौ के नौ ग्रह भी उल्टे हो जाएं तो भी हनुमान की उपासना से उसका कोई अनिष्ट नहीं होता है, क्योंकि हनुमान दसवां ग्रह है और वह है अनुग्रह। हनुमान को पाने का एक ही मंत्र है हनुमान चालीसा। कथा में प्रधान सुरेन्द्र चौधरी, सेवादार प्रेम अग्रवाल, हनुमानप्रसाद चनाणी, मदनगोपाल चौधरी, सुरेन्द्र सिंगल पुजारी, शंकरलाल बजाज, लक्ष्मीकांत शर्मा, केडी लीला, विजय गोयल, पवन राजपाल, योगेश वधवा, विक्की मेहता, बृजलाल चलाना, अमित ग्रोवर, केके सोनी, दिनेश चावला, योगेश मक्कड़ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
हनुमान को पाने का एक ही मंत्र है हनुमान चालीसा :
कृष्णानंद महाराज ने कहा कि यदि हनुमान न होते तो जगत में रामकथा भी न होती। जिन्हें भी भगवान के दर्शन हुए हनुमान की कृपा से हुए। चाहे वानर हो, सुग्रीव हो, विभीषण हो अथवा जानकी। यदि हनुमान से हमारा संबंध स्थापित हो गया तो किसी अन्य देव की जरूरत ही नहीं। जिस काम को ब्रह्मा , विष्णु, महेश भी नहीं कर सकते उसे हनुमान कर सकते हैं। यदि ज्योतिष के अनुसार मनुष्य के नौ के नौ ग्रह भी उल्टे हो जाएं तो भी हनुमान की उपासना से उसका कोई अनिष्ट नहीं होता है, क्योंकि हनुमान दसवां ग्रह है और वह है अनुग्रह। हनुमान को पाने का एक ही मंत्र है हनुमान चालीसा। कथा में प्रधान सुरेन्द्र चौधरी, सेवादार प्रेम अग्रवाल, हनुमानप्रसाद चनाणी, मदनगोपाल चौधरी, सुरेन्द्र सिंगल पुजारी, शंकरलाल बजाज, लक्ष्मीकांत शर्मा, केडी लीला, विजय गोयल, पवन राजपाल, योगेश वधवा, विक्की मेहता, बृजलाल चलाना, अमित ग्रोवर, केके सोनी, दिनेश चावला, योगेश मक्कड़ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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