
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष को अनन्त चतुर्दशी है, जो इस बार रविवार 23 सितंबर को मनाई जाएगी। अनंत का अर्थ होता है जिसका न आदि पता है और न ही अंत, अर्थात श्री हरि। इस व्रत में स्नानादि करने के पश्चात अक्षत, दूर्वा, शुद्ध रेशम या कपास के सूत से बने और हल्दी से रंगे हुई चौदह गांठ के अनंत को सामने रखकर हवन किया जाता है।
ये 14 गांठें हरि द्वारा उत्पन्न 14 लोकों चौदह लोकों तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी की प्रतीक हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को यदि 14 वर्षों तक किया जाए, तो व्रत करने वाले को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
फिर अनंतदेव का ध्यान करके इस शुद्ध अनंता को पुरुष दाहिने और स्त्रियां बाएं हाथ में बांधती हैं। इस व्रत में एक समय बिना नमक के भोजन किया जाता है। निराहार रहें, तो और अच्छा है। इसी दिन प्रथम पूज्य गणेश जी की मूर्तियों का विसर्जन भी गणेश भक्तों द्वारा किया जाता है।
अनंत संसार महासमुद्रे मग्नान् समभ्युद्धर वासुदेव।
अनन्तरूपे, विनियोजितात्मा ह्यनंतरूपाय नमो नमस्ते॥
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